श्री मद गुरुभ्यो नमः

श्री मद गुरुभ्यो नमः

Saturday, September 04, 2010

प्रथमः पाठः

                                प्रथमः पाठः
नमो-नमः 

स्व परिचयः
मम नाम भूपेन्द्रः [मेरा नाम भूपेंद्र है] 

भवतः नाम किम् ? [पुरुष से -आपका क्या नाम है?] 

भवत्यः नाम किम् ?[स्त्री से-आपका क्या नाम है ?]

सः बालकः [ वह बालक है ]

सः कः ?[ वह कौन ] 

सा बालिका [ वह बालिका है ]

सा का? [ वह कौन]

तत् पुष्पम् [ वह फूल है ]

तत् किम् [ वह क्या है 

2 comments:

आनन्‍द पाण्‍डेय said...

प्रिय भूपेन्द्र जी
आपका प्रयास बहुत ही उत्‍तम एवं सार्थक है ।
आपका संस्‍कृतलेखन भी अतीव शोभन है ।
आप संस्‍कृत माता के लिये महत्‍वपूर्ण प्रसार कार्य कर रहे हैं ।
आप जैसे ही संस्‍कृत विद्वानों के जालजगत पर एकत्रीकरण के लिये संस्‍कृतम् - भारतस्‍य जीवनम् जालपृष्‍ठसंग्राहक का विकास किया गया है ।
आप से अनुरोध है कि कृपया संस्‍कृत के वृहद प्रसार के लिये आप इस संग्राहक के लेखक बनें ।

संस्‍कृत के विद्वानों का जालजगत पर एकत्रीकरण संस्‍कृत भाषा को नया आयाम दे सकता है ।

आपका
आनन्‍द
पाण्‍डेय
(संग्राहक प्रमुख)

kapil said...

bhupendra ji namo namh
mere vakya-
sah shikahah
saa mata
tat pushpam
ye vakya sahi hai ya nahi batane ka kasht karen
aapka kapil singh rewa