श्री मद गुरुभ्यो नमः

श्री मद गुरुभ्यो नमः

Wednesday, June 23, 2010

सरस्वती वंदना

ॐ शिव ॐ



या कुंदेंदु तुषार हारधवला ,या शुभ्र वस्त्रावृता
या वीणा वर दण्डमंडितकरा , या श्वेत पद्मासना
या ब्रह्मा- च्युत शंकर -प्रभृति -भिः देवैःसदा वन्दिता
सा मांपातु सरस्वती भगवती निः -शेष जाड्यापहा||
अर्थात - जो चंद्रमा के समानउज्जवल स्वच्छ है , जो शुद्ध सफेद वस्त्रों को धारण किये हुए है ,
जिसके हाथ में वीणा और वर देने से युक्त स्फटिक की माला सुशोभित हो रही है ,
जो सफेद कमल के आसन में आसीन है ,जिसकी ब्रह्मा , विष्णु और शिव आदि
सभी देवता भी उपासना करते हैं वह माँ सरस्वती हमारी जड़ता को दूर करे
औए हमें निर्मल बुद्धि प्रदान करें
यह श्लोक के साथ मंत्र भी है यदि इसकी नित्य प्रति प्रातः - सायं वंदना की जाये तो निश्चित ही
बुद्धि निर्मल होती है और मेधा की वृद्धि होती है
ॐ शिव ॐ

2 comments:

amit said...

BHupendra ji namaskaaram
Aham tav lekhan aptham ativ prashannta jata ,yatohi bhavatah prayash tu sarvdaiv gyan prkashay bhavati atah aham bhavta preritah ch
Sarswtyah vandana ativ subha.
krupya sanskrit gitani api likhantu
Amit sharma

amitabh said...

Bhupendra ji namaste
mai sanskrit to nahi janta par itna to hai ki samjh leta hu aur shlok padne me mujhe bahut maza aata hai krupya kuch shlok likhate rahen
Dhanyawad