श्री मद गुरुभ्यो नमः

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Thursday, February 17, 2011

हिंदी की सूक्तियां-भय, अभय , निर्भय


भय, अभय , निर्भय
तावत् भयस्य भेतव्यं , यावत् भयं न आगतम् ।
आगतं हि भयं वीक्ष्य , प्रहर्तव्यं अशंकया ॥
भय से तब तक ही दरना चाहिये जब तक भय (पास) न आया हो । आये हुए भय को देखकर बिना शंका के उस पर् प्रहार् करना चाहिये ।
— पंचतंत्र
जो लोग भय का हेतु अथवा हर्ष का कारण उपस्थित होने पर भी विचार विमर्श से काम लेते हैं तथा कार्य की जल्दी से नहीं कर डालते, वे कभी भी संताप को प्राप्त नहीं होते।
- पंचतंत्र
‘भय’ और ‘घृणा’ ये दोनों भाई-बहन लाख बुरे हों पर अपनी मां बर्बरता के प्रति बहुत ही भक्ति रखते हैं। जो कोई इनका सहारा लेना चाहता है, उसे ये सब से पहले अपनी मां के चरणों में डाल जाते हैं।
- बर्ट्रेंड रसेल
मित्र से, अमित्र से, ज्ञात से, अज्ञात से हम सब के लिए अभय हों। रात्रि के समय हम सब निर्भय हों और सब दिशाओं में रहनेवाले हमारे मित्र बनकर रहें।
- अथर्ववेद
आदमी सिर्फ दो लीवर के द्वारा चलता रहता है : डर तथा स्वार्थ |
-– नेपोलियन
डर सदैव अज्ञानता से पैदा होता है |
-– एमर्सन
अभय-दान सबसे बडा दान है ।
भय से ही दुख आते हैं, भय से ही मृत्यु होती है और भय से ही बुराइयां उत्पन्न होती हैं ।
— विवेकानंद